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Narmada Jayanti 2025: उज्जैन में पूजा-अर्चना, दीपमालिका और पंचामृत अभिषेक से महक उठा महाकालेश्वर मंदिर, रामघाट पर भी हुआ विशेष आयोजन; श्रद्धालुओं ने देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
माघ शुक्ल सप्तमी को मां नर्मदा का धरती पर अवतरण हुआ था, इस दिन को नर्मदा जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो न सिर्फ हमारे जीवन में शांति और समृद्धि लाता है, बल्कि एक देवी की पवित्रता को भी जागृत करता है। इस वर्ष 4 फरवरी 2025 को नर्मदा जयंती धूमधाम से मनाई गई।
बता दें, उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को नर्मदा जयंती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति से भरपूर वातावरण का अनुभव किया। मंदिर परिसर स्थित कोटितीर्थ कुंड पर माता नर्मदा की आकर्षक और दिव्य झांकी सजाई गई, जो हर श्रद्धालु का ध्यान अपनी ओर खींच रही थी।
सायंकाल गोधूलि वेला में विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया, जो एक अद्भुत और आस्था से ओत-प्रोत क्षणों का गवाह बना। इस परंपरा को पिछले 25 वर्षों से निरंतर निभाया जा रहा है। कोटितीर्थ कुंड की विशिष्टता यह है कि यहां प्रमुख कोटि तीर्थों का वास माना जाता है, जिनमें माता नर्मदा का स्थान अहम है।
इस आयोजन में शाम 7 बजे 11 ब्राह्मणों द्वारा लघुरुद्र पाठ के साथ माता नर्मदा का पंचामृत अभिषेक किया गया, जो एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। साथ ही, कुंड की सीढ़ियों पर 1100 दीपकों की भव्य दीपमालिका सजाई गई, जो अद्भुत रूप से रौशन हो रही थी और पूरी जगह को दिव्यता से भर दे रही थी।
इस अवसर पर महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन, पार्षद रजत मेहता और मंदिर प्रशासन के अधिकारी एवं पुजारी-पुरोहित परिवार के सदस्य उपस्थित थे। पूजन-अर्चन के बाद भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया।
इसी दिन रामघाट पर भी विशेष आयोजन हुआ, जहां मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तट पर संध्या समय में माता शिप्रा और नर्मदा का दूध से अभिषेक कर चुनरी अर्पित की गई और भव्य आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया।